Mutual Fund : म्यूचुअल फंड्स से होने वाली कमाई पर कितना लगता है इनकम टैक्स? जानिए आसान शब्दों में

Mutual Fund Tax : अगर आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं या इसमें निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं तो आपके लिए भी यह जानना जरूरी है कि म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई पर कितना टैक्स लगता है।

Mutual Fund Tax

How mutual funds are taxed in India : आज के समय में लगभग हर कोई अपने हिसाब से किसी न किसी म्यूचुअल फंड स्कीम में एसआईपी के माध्यम से निवेश कर रहा है।

ऐसा हो भी क्यों ना लंबी अवधि में बिना ज्यादा रिस्क या टेंशन लिए अच्छा पैसा बनाने के लिए यह एक बहुचर्चित विकल्प है। लेकिन म्यूचुअल फंड्स से होने वाली कमाई पर भी आपको टैक्स देना पड़ता है जोकि हर फंड के लिए अलग–अलग हो सकता है।

अगर आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं या इसमें निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं तो आपके लिए भी यह जानना जरूरी है कि म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई पर कितना टैक्स लगता है। आइए जानते हैं

म्यूचुअल फंड्स तीन तरह के होते हैं। पहला इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड, दूसरा डेट म्यूचुअल फंड या गोल्ड/सिल्वर म्यूचुअल फंड और तीसरा हाईब्रिड म्यूचुअल फंड। आइए जानते हैं इन सभी म्यूचुअल फंड्स पर आपको कितना टैक्स देना पड़ेगा।

1. इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड

इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स वैसे म्यूचुअल फंड्स होते हैं जिनके एसेट का 65% या उससे अधिक हिस्सा भारत में लिस्टेड कंपनियों के शेयर में लगा होता है। इन म्यूचुअल फंड्स से पैसे निकालने पर शेयर के जैसे ही टैक्स लगता है।

इन पर दो तरह से टैक्स लगता है। पहला शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स और दूसरा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स।

इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में अगर आप अपने निवेश को 12 महीने से ज्यादा समय तक बनाए रखता हैं तो इसे लॉन्ग टर्म के हिसाब से देखा जाता है।

ऐसे में अगर आप 12 महीने से अधिक समय तक निवेशित रहकर पैसे निकालते हैं तो आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ेगा जोकि 10% के हिसाब से देना पड़ता है। लेकिन एक वित्त वर्ष में 1 लाख रुपए तक के मुनाफा पर आपको इसमें कोई टैक्स नहीं देना होगा।

वहीं, अगर आप 12 महीने से कम समय तक निवेशित रहकर अपने पैसे निकाल लेते हैं तो ऐसे में आपको शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा जोकि 15% के बराबर होता है।

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2. डेट या गोल्ड/सिल्वर म्यूचुअल फंड

यह वैसे म्यूचुअल फंड होते हैं जिनका भारत की लिस्टेड कंपनियों में 35% से कम का निवेश होता है। इन म्यूचुअल फंड में 1 अप्रैल, 2023 या उसके बाद निवेश करने पर आपको होल्डिंग पीरियड के हिसाब से टैक्स नहीं देना होगा। इससे होने वाले मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन की कैटेगरी में रखा जायेगा जोकि आपके इनकम में जुड़ेगा और आपके साल रेट के हिसाब से उसपर टैक्स लगेगा।

हालांकि, डेट म्यूचुअल फंड में आपको इंडेक्सेशन का फायदा मिल सकता है। अगर आपका निवेश 31 मार्च 2023 या उससे पहले का है तो इस स्थिति में डेट म्यूचुअल फंड को 36 महीने से ज्यादा समय तक होल्ड करके बेचने पर आपको इंडेक्सेशन बेनेफिट के बाद मुनाफे पर 20% की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। लेकिन 36 महीने से पहले बेचने पर आपको शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा लागू होगा।

3. हाईब्रिड म्यूचुअल फंड

हाईब्रिड म्यूचुअल फंड उन म्यूचुअल फंड्स को कहते हैं जिनके एसेट का 35% से ज्यादा और 65% से कम हिस्सा भारत की लिस्टेड कंपनियों के शेयर में लगा होता है।

इन म्यूचुअल फंड्स में अगर आप 36 महीने से ज्यादा समय तक निवेशित रहते हैं तो इसे लॉन्ग टर्म की कैटेगरी में रखा जायेगा और इसपर भी आपको इंडेक्सेशन का फायदा मिलेगा जिसके तहत इंडेक्सेशन के बाद आपके मुनाफे पर 20% की दर से टैक्स लगेगा। वहीं, 36 महीने से कम समय तक निवेशित रहने पर इसे शॉर्ट टर्म की कैटेगरी में रखा जायेगा और इसे रेगुलर इनकम की तरह माना जायेगा जिसपर आपको अपने स्लैब रेट के अनुसार टैक्स देना होगा।

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Disclaimer : यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है। यह निवेश की सलाह नहीं है। यह आर्टिकल ऊपर बताए गए शेयर में निवेश करने की सलाह नहीं देता। इस आर्टिकल से होने वाले नुकसान के लिए हम तथा एक्सपर्ट/ ब्रोकरेज फर्म/ हाउस जिम्मेदार नहीं होंगे। शेयर मार्केट में निवेश बाज़ार के जोखिमों के अधीन होता है तथा किसी भी तरह का निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें।

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